अंगद रावण दरबार में

अंगद रावण दरबार में इस प्रकार से युद्ध चल ही रहा था कि सूर्यदेव अस्त हो गये तथा प्राणों का ...
Read moreसीता के साथ छल

सीता के साथ छल जब रावण के गुप्तचरों ने बताया कि श्री रामचन्द्र जी की सेना सुवेल पर्वत पर आकर ...
Read moreसेतु बन्धन
सेतु बन्धन वानरसेना के समक्ष विशाल समुद्र लहरें मार रहा था और उसे पार करना एक बहुत बड़ी समस्या थी। ...
Read moreविभीषण का श्री राम की शरण में आना

विभीषण का श्री राम की शरण में आना रावण से अपमानित होकर विभीषण अपने चार भयंकर तथा पराक्रमी अनुचरों के ...
Read moreविभीषण का निष्कासन

विभीषण का निष्कासन दूसरे दिन महान मेघों की गर्जना के समान घर्घराहट पैदा करने वाले मणियों से अलंकृत चार घोड़ों ...
Read moreलंका में राक्षसी मन्त्रणा

लंका में राक्षसी मन्त्रणा इन्द्रतुल्य पराक्रमी हनुमान जी ने लंका में जो अत्यन्त भयावह घोर कर्म किया था, उसे देखकर ...
Read moreवानर सेना का प्रस्थान

वानर सेना का प्रस्थान हनुमान के मुख से लंका का यह विशद वर्णन सुन कर रामचन्द्र बोले, हनुमान! तुमने भयानक ...
Read moreयुद्धकाण्ड – समुद्र पार करने की चिन्ता

युद्धकाण्ड – समुद्र पार करने की चिन्ता हनुमान के मुख से सीता का समाचार पाकर रामचन्द्र जी अत्यन्त प्रसन्न हुये ...
Read moreसीता का संदेश देना

सीता का संदेश देना समस्त वृतान्त सुनने के पश्चात् सुग्रीव सभी आगत वानरों सहित विचित्र कानों से सुशोभित प्रस्रवण पर्वत ...
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